Skip to main content

Followers

ऐसे लोग ही जीवन में सफल हो पाते हैं-पं. श्रीराम शर्मा आचार्य



पं. श्रीराम शर्मा आचार्य/शांतिकुंज, हरिद्वार

हर इंसान तरह-तरह के मन के लड्डू बनाते हैं, सुखी, समृद्ध होने के बड़े-बड़े मनसूबे पालते हैं परन्तु उन में से सफल बहुत ही थोड़े हो पाते हैं। शेखचिल्ली के से सपने यदि सफल हो जाया करें तो पुरुष और पौरुष का कोई फर्क ही इस संसार में नहीं रहता।
इच्छा, प्रयत्न, परिश्रम, लगन और दृढ़ता न हो तो सफलता की देवी ऐसे लोगों की ओर आंख उठाकर भी नहीं देखती। सिद्धि उन्हें ही मिलती है जो अपनी चाहत को पूरी करने के लिए जी जान से प्रयास करते हैं।
ज्ञानीजनों ने कहा है- “उद्योगि नं पुरुष सिंह भुपैति लक्ष्मी, दैवेनदेव मति का पुरुषो बदन्ति।” लक्ष्मी उद्योगी पुरुषों को ही प्राप्त होती है और कायर लोग दैव-दैव पुकारा करते हैं। एक अन्य वचन है कि- ‘कायरा इति जल्पन्ति यद्भाव्यं तद्भविष्यति” कायर लोग ऐसी बकवास करते रहते हैं कि जो होना है वही होगा। “न प्रसुप्तस्य सिंहस्य प्रविशंति मुखे मृगाः” सोते हुए सिंह के मुख में हिरन खुद प्रवेश नहीं करते, बल्कि सिंह को ही उन मृगों को पकड़ना और खाना पड़ता है।
रामायण का कथन है- “दैव दैव आलसी पुकारा।” भाग्य के भरोसे बैठे रहने से तरह-तरह की कल्पना करते रहने से, कुछ प्राप्त नहीं होता। इच्छा को पूर्ण करने के लिए जो निरन्तर उत्साहपूर्वक प्रयत्न करते हैं, वे ही सफलता के भागी होते हैं।
सफलता के इच्छुक व्यक्तियों को बाइबिल का यह वचन ध्यान रखना चाहिए कि “जो सच्चाइ से मांगता है उसे दिया जाता है।” सचाई से मांगने का अर्थ है पूरे परिश्रम उत्साह और संयम के साथ इच्छित वस्तु की प्राप्ति में जी जान से जुट जाना। आप यदि मनोरथ सफल करना चाहते हैं, सिद्धि की सीढ़ी पर चढ़ना चाहते हैं तो घोर प्रयत्न और दृढ़इच्छा को अपना साथी बना लीजिए, प्रयत्न के ऊपर प्राप्ति निर्भर है। याद रख लीजिए जो पाना चाहता है उसे ही मिलता है।

Comments

Popular posts from this blog

बागेश्वर धाम कैसे जाएं? छतरपुर, बागेश्वर धाम

  अगर आप अध्यात्म से जुड़ना चाहते हैं और अपने सांसारिक समस्याओं से निजात पाना चाहते हैं तो बागेश्वर धाम की यात्रा कर सकते हैं। वहां जाकर बालाजी महाराज से अर्जी लगाने पर हनुमान जी की कृपा से आपकी सारी दुख परेशानियां दूर हो जाती हैं। बागेश्वर धाम में स्वयंभू हनुमान जी यानी कि बालाजी महाराज का दिव्य मंदिर हैं, जहां लाखों लोग अपनी अर्जियां लगाने जाते हैं और अपनी समस्याओं तथा दुखों से निजात पाते हैं। पण्डित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी इसी बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर हैं, जिन्हें बागेश्वर धाम सरकार के नाम से भी जाना जाता है। इन दिनों बागेश्वर धाम सरकार के साथ-साथ बागेश्वर धाम भी पूरे भारत में विख्यात हो गया है। इस धाम की महिमा ही ऐसी है कि आज हर कोई यहां जाकर बालाजी महाराज के दर्शन करना चाहता है और अपनी अर्जी लगाना चाहता है। कहा जाता है कि बागेश्वर धाम में बालाजी महाराज अपने भक्तों की अर्जियां बागेश्वर धाम सरकार यानी कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के माध्यम से सुनते हैं और उनके ही माध्यम से अपने भक्तों की समस्याओं का समाधान भी करवाते हैं। अगर आप भी बागेश्वर धाम के बारे में अधिक जानकारी च...

जानें कौन हैं बागेश्वरधाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, क्या है मदिंर का इतिहास?

 जानें कौन हैं बागेश्वरधाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, क्या है मदिंर का इतिहास? Bageshwar Dham: यह बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) मंदिर सालों पुराना है. 1986 में इस मंदिर का रेनोवेशन कराया गया था. इसके बाद 1987 के आसपास वहां पर एक संत का आगमन हुआ. मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम सरकार (Bageshwar Dham Sarkar) की आजकल खूब चर्चा हो रही है. फिलहाल यहां के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर नागपुर में कथा बीच मे छोड़कर भागने का आरोप लग रहा है. वहीं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी ताल ठोंकर विरोधियों को जवाब दे रहे हैं. अभी पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की रामकथा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुरू हो गई है. सोशल मीडिया पर तो बागेश्वर धाम सरकार के छोटे-छोटे वीडियो खूब वायरल होते हैं. नेताओं में तो बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा कराने के लिए होड़ मची है. दावा किया जाता है कि बागेश्वर धाम में आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं बागेश्वर धाम सरकार द्वारा पूरी की जाती हैं. क्या है  ताजा विवाद बागेश्वर धाम सरकार का इतिहास जानने से पहले आपको बताते चलें कि उन...

आप जानते हैं बागेश्‍वर धाम का रहस्‍य

  पुरा कथाओं में भगवान शिव के बाघ रूप धारण करने वाले इस स्थान को व्याघ्रेश्वर तथा बागीश्वर से कालान्तर में बागेश्वर के रूप में जाना जाता है।[1] शिव पुराण के मानस खंड के अनुसार इस नगर को शिव के गण चंडीश ने शिवजी की इच्छा के अनुसार बसाया था।[2][3] स्कन्द पुराण के अन्तर्गत बागेश्वर माहात्म्य में सरयू के तट पर स्वयंभू शिव की इस भूमि को उत्तर में सूर्यकुण्ड, दक्षिण में अग्निकुण्ड के मध्य (नदी विशर्प जनित प्राकृतिक कुण्ड से) सीमांकित कर पापनाशक तपस्थली तथा मोक्षदा तीर्थ के रूप में धार्मिक मान्यता प्राप्त है। ऐतिहासिक रूप से कत्यूरी राजवंश काल से (७वीं सदी से ११वीं सदी तक) सम्बन्धित भूदेव का शिलालेख इस मन्दिर तथा बस्ती के अस्तित्व का प्राचीनतम गवाह है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार सन् १६०२ में राजा लक्ष्मी चन्द ने बागनाथ के वर्तमान मुख्य मन्दिर एवं मन्दिर समूह का पुनर्निर्माण कर इसके वर्तमान रूप को अक्षुण्ण रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।[4] उन्होंने बागेश्वर से पिण्डारी तक लगभग ४५ मील (७० किमी.) लम्बे अश्व मार्ग के निर्माण द्वारा दानपुर के सुदूर ग्राम्यांचल को पहुँच देने का प्रयास भी कि...